Monday, June 2, 2008

मनसिज तीर चलता है, प्रेम स्वपन दिखाता है,

फागुन मे लाज हीना हैं , मेला घूमते से पात

आवारा आज बने होली में बंजारा तन मन के गात,

रंग कुंडल आज पहन मदिर हो ये फागुनी प्रात

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