मनसिज तीर चलता है, प्रेम स्वपन दिखाता है,
फागुन मे लाज हीना हैं , मेला घूमते से पात
आवारा आज बने होली में बंजारा तन मन के गात,
रंग कुंडल आज पहन मदिर हो ये फागुनी प्रात
Post a Comment
No comments:
Post a Comment