Wednesday, January 21, 2009
एक गुजारिश हर माता पिता से
बहुत दिनों से एक विचार मेरे मन को लगातार झकझोर रहा है । अभी कुछ दिनों पहले की बात है, मै अपने एक बहुत अच्छे मित्र की "जिंदगी (ये कहना ज्यादा उचित होगा क्योंकि गर्लफ्रेंड शब्द मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत हल्का लगता है) से मिल कर आया । मेरा ये मित्र इस वक्त अजीब सी दुविधा में उलझा हुआ है जो शायद हर एक प्यार करने वाले के साथ होती है । ये न तो अपने माता पिता को निराश कर सकता है और न ही इस लड़की के बिना खुश रह सकता है। अगर वो अपने माता पिता की इच्छा के विरुद्ध जाए तो ये उनका अनादर होगा और अगर उनकी बात माने तो शायद पूरी जिंदगी भर एक कसक रह जायेगी । पता नही क्यों हमारे माता पिता हमारे और सभी निर्णय में हमारे साथ होते हैं चाहे वो पढ़ाई के बारे में हो या फिर कैरियर के बारे में हो, हमारे हर निर्णय में उनका साथ बिना किसी शर्त के मिलता है; हर बार वो हमें हौसला देते हैं जाओ बेटा आगे बढो हम तुम्हारे साथ हैं, अगर तुम कही गिरे भी तो हम तुम्हे संभालेंगे , पर जब हमे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लेना होता है तो वो पीछे हट जाते हैं और कहते हैं की जो कुछ भी होगा वो तुम्हारी जिम्मेदारी होगी। मैं ये नही कहता की माता पिता इस बारे में सही निर्णय नही ले सकते पर जिस तरह वो अपने बच्चे के और सभी निर्णय पर साथ होते हैं , इस फैसले पर भी साथ हो सकते हैं। वो अगर पूरे सहयोग के साथ बच्चे को दिशा दिखाएँ तो इस निर्णय की इस दुविधा से बचा जा सकता है । वही माता पिता शाहरुख़ की हौसले की तारीफ़ करते हैं की उसने एक हिंदू लड़की से शादी की पर अपने बच्चे के मामले में ठीक इसका उल्टा व्यव्हार करते हैं , वो भी उस दिखावटी समाज के उन लोगो के लिए जो शायद ही कभी जरूरत के वक्त काम आए । उन लोगो की संतुष्टि के लिए अपने बच्चों की खुशी का गला घोंट देते हैं जिनका उनकी खुशी या गम से कुछ लेना देना नही होता। मेरी इस ब्लॉग को पड़ने वाले से बस एक ही गुजारिश है की अगली बार जब अपने समाज को संतुस्ट करने के लिए कोई फैसला लें तो एक बार उसकी कीमत जरूर देख ले; ये जरूर देखें की उनके लिए क्या ज्यादा जरूरी है चंद बनावटी लोगो की दिखावे की संतुष्टि ; चंद रुपये या अपने जिगर के टुकडों की खुशी । एक बार अपने बच्चों से कह कर के तो देखिये जा बेटा मैं तेरे हर फैसले में तेरे साथ हूँ फिर वो भी आपकी इच्छाओं का कितना ख्याल रखता है।
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