बारिश की बूँदें, आकाश में बादल, हरी घांसों से भरा मैदान, ये सब कुछ ऐसी चीजें हैं जो शायद हमे वो न दे जो हमें चाहिए, शायद ये सब एक बड़ी खुशी की जगह न ले सके पर ये छोटी छोटी बातें हमे जीना सिखाती हैं वो भी हंसते हुए। मुझे आज भी याद है एक वो समय भी था जब मुझे ये सारी चीजें किसी भी तरह से आकर्षित नहीं करती थीं ।
एक बार मैंने haribansh rai bacchan की एक कविता padhi थी जो कुछ इस तरह से थी
जो बीत गयी वो बात गयी
ambr के aanan को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
पर अपने टूटे तारों पर
कब ambar शोक manata है
मेरी nakaratmak सोच की hadh देखिये की मैंने इसके आगे लिख दिया
हाँ अपने टूटे तारों पर ambar भी शोक manata है
अपने megho के आँखों से वो भी neer Bahaata है
फिर मैं कैसे कह दूँ जो बीत गयी वो बात गयी ।
सो, दोस्तों इस तरह की nakaaratmakta से bachen और जिंदगी के हर एक pal को khusiyon से bahr दे ।
Friday, July 4, 2008
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